5/10/2007

बाप रे बाप ! यह क्‍या है ?






सिक्‍कों का अनोखा सन्‍तुलन, काश ऐसा सन्‍तुलन जिन्‍दगी मे भी होता

3 comments:

ढंढोरची said...

अरे भाया सब का टैम काहे खोटी करते हो। वैसे खोज अच्छी है फो्टुअन की।

संजय बेंगाणी said...

पैसो से/पैसो के लिए संतुलन करना आ जाता है. :)

Udan Tashtari said...

खूब पैसों की फोटू खिंचे हो. सही है.